कानून पर विश्वास तो होगा,पर किसी का विश्वास टूटने के बाद...
अक्सर प्रभावशाली नेता या अपराधी को आपने ये कहते सुना होगा ""उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है""..............
उसी क्षण ये बात सिद्ध हो जाती की कहीं न कहीं इनकी पहुच कानून के उस तख्त तक है, जहाँ का फैसला भी
इनके इशारे का होगा, या फिर इशारा भी इनके पक्ष के
फैसले का ही होगा। ये बात समझने की जरुरत है की उन मक्कार लोगो को कानून पर भरोसा तो होता परंतु इस बात का .....कि जब केस अदालत में आ जायेगा तो उसे ये मौका जरूर
मिलेगा जब केस की सुनवाई होते होते उसके अपने चार जन्म हो चुके होंगे या फिर किसी तिलचट्टे की योनि में होगा और उसी अदालत की आलमारी में अपने केस की फाइल पर बैठा हँसेगा।
उसे विश्वास होता है की अब तो जल्दी फैसला आने से
रहा, जब चाहो अपने हिसाब से डेट ले लो, अपने हिसाब से फैसला सुनवा लो, शायद इसी लिए तन कर कहता है.....मुझे तो पूरा भरोसा है कानून पर
और सामने वाला कमजोर व्यक्ति समझ जाता है इनकी
पहुच बहुत ऊँची है, और उसी क्षण उसका भरोसा कानून से टूट जाता है।
("Justice delayed is justice denied")
तो आम जनता का विश्वास कानून पर हो इसके लिए
जरुरी है की प्रभावशाली और अपराधियो का विश्वास
कानून से टूटे (जिस सेंस में उनका विश्वास होता है)तभी आमजन के भरोसा कानून पर अटूट होगा।

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