लोकतंत्र_बचाओ_अभियान
यदि हम अपने देश में लोकतंत्रात्मक व्यवस्था होने का दावा करते है तो इसके लिए सबसे ज्यादा जरुरी चीज ये है कि अधिक से अधिक लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करे।"वोट" या मताधिकार के बिना लोकतंत्र कि कल्पना नही की जा सकती है, तो मतलब साफ है सत्ता में बैठी सरकार की ये जिम्मेदारी है की मतदान की प्रक्रिया को साधारण और आसान बनाये, न कि जटिल।
क्या कभी आपने सोचा है क्यों मतदान के दिन अपने देश के निर्वाचन क्षेत्रो में मतदान का प्रतिशत बहुत कम होता है????
क्या कभी आपने सोचा है क्यों मतदान के दिन अपने देश के निर्वाचन क्षेत्रो में मतदान का प्रतिशत बहुत कम होता है????
क्यों सबकी भागीदारी मतदान या मताधिकार के प्रयोग में नही हो पाता है???
तो जवाब है लोगो के साथ साथ सरकार भी जागरूक नही है, और मतदान की जो प्रक्रिया है उसके नियम कानून कुछ ऐसे है कि साधारण व्यक्ति पोलिंग बूथ तक जाता है और अपने मताधिकार का प्रयोग किये बिना वापस आ जाता है| इस तरफ ना ही सरकार का ध्यान जाता है, ना ही विपक्ष के नेताओ का. जो लोकतान्त्रिक तरीके का गुहार सिर्फ उस वक्त लगाते रहते जब सवाल उनके ऊपर उठता या उनका करियर खतरे में होता।
आज मै पोलिंग बूथ पर एक महानुभाव द्वारा बुलाया गया, कि कुछ लोगो का नाम मतदान के लिए वहा मौजूद लिस्ट में नही था, जिसे नेट द्वारा इलेक्शन कमीशन के साइट से निकालना था, मै जब पोलिंग बूथ पर पंहुचा तो वहा जो आलम था उसे देख के बहुत दुःखी हुआ, अपने देश में बेमतलब के कितने मुद्दे उठते रहते है, परंतु जिन मुद्दों की सबसे ज्यादा जरुरत होती, उस तरफ किसी का भी ध्यान नही जाता। लोग भारत सरकार द्वारा प्राप्त "वोटर आइडी" ले के आ रहे और उनका नाम वोटर लिस्ट में ना होने के कारण वोट देने से वंचित किये जा रहे है, उन्ही लोगो के लिए मै बुलाया गया था की उनका नाम चेक कर सकूँ कि क्या वेबसाइट पर अंकित है या नही, तब तो और अफ़सोस हुआ कि वेबसाइट भी अपडेट नही थी, चेक करने के लिए मैंने वहा के लिस्ट में मौजूद नाम को वेबसाइट से चेक किया तो रिजल्ट नॉट फाउंड मिला जिससे जाहिर हो गया कि वेबसाइट भी सरकार की ही तरह है जो आज आजादी के बाद भी अपडेट नही हो पाई है। उस महिला के लिए क्या जवाब है सरकार के पास जो साइकिल चला के बूथ तक अपने वोटर आइडी के साथ आई थी परंतु नाम लिस्ट में नही था?? उस बूढ़े बाबा के लिए क्या जवाब है जिनकी उम्र 90 की थी और लाठी टेकते हुए बूथ तक आये पर बिना वोट दिए वापस जाना पड़ा कारण वोटर आईडी है पर लिस्ट में नाम नही।
आज मै पोलिंग बूथ पर एक महानुभाव द्वारा बुलाया गया, कि कुछ लोगो का नाम मतदान के लिए वहा मौजूद लिस्ट में नही था, जिसे नेट द्वारा इलेक्शन कमीशन के साइट से निकालना था, मै जब पोलिंग बूथ पर पंहुचा तो वहा जो आलम था उसे देख के बहुत दुःखी हुआ, अपने देश में बेमतलब के कितने मुद्दे उठते रहते है, परंतु जिन मुद्दों की सबसे ज्यादा जरुरत होती, उस तरफ किसी का भी ध्यान नही जाता। लोग भारत सरकार द्वारा प्राप्त "वोटर आइडी" ले के आ रहे और उनका नाम वोटर लिस्ट में ना होने के कारण वोट देने से वंचित किये जा रहे है, उन्ही लोगो के लिए मै बुलाया गया था की उनका नाम चेक कर सकूँ कि क्या वेबसाइट पर अंकित है या नही, तब तो और अफ़सोस हुआ कि वेबसाइट भी अपडेट नही थी, चेक करने के लिए मैंने वहा के लिस्ट में मौजूद नाम को वेबसाइट से चेक किया तो रिजल्ट नॉट फाउंड मिला जिससे जाहिर हो गया कि वेबसाइट भी सरकार की ही तरह है जो आज आजादी के बाद भी अपडेट नही हो पाई है। उस महिला के लिए क्या जवाब है सरकार के पास जो साइकिल चला के बूथ तक अपने वोटर आइडी के साथ आई थी परंतु नाम लिस्ट में नही था?? उस बूढ़े बाबा के लिए क्या जवाब है जिनकी उम्र 90 की थी और लाठी टेकते हुए बूथ तक आये पर बिना वोट दिए वापस जाना पड़ा कारण वोटर आईडी है पर लिस्ट में नाम नही।
कितना बेवकूफी सा कारण लगता है जहा वोटर आईडी उन्ही का बनता है जो 18 साल के ऊपर और भारतीय हो जिन्हें वोट देने का अधिकार हो, तो क्या वोटर आईडी इशू करने वाली ऑथोरिटी को ये नही पता कि उसका लिस्ट में नाम नही जायेगा तो वो वोट नही दे पायेगा, फिर इस वोटर आईडी का कोई मतलब नही तो क्यो ना उसे बहुत ही ध्यान से अपडेट किया जाये। या फिर वोटर आईडी के आधार पर ही वोट देने दिया जाये, ये प्रक्रिया इतना जटिल है जो मतदान हेतु उत्साहित करने के बजाय मताधिकार से वंचित कर देती है।
मै जिक्र करना चाहूँगा ब्रिटेन का जहा 1703 में ही न्याय पालिका लोकतंत्र के लिए इतनी जागरूक थी कि" Ashby v. White, 1703 के केस में जहा एक व्यक्ति को वोट देने से रोक दिया गया था, हालांकि वही प्रत्यासी जीता था जिसे वो वोट देना चाहता था, इसके वावजूद भी उसे अपने मताधिकार का प्रयोग से रोकने के लिए न्यायमूर्ति Holt CJ ने क्षतिपूर्ति दिलवाई थी। इसी तरह दूसरा उदहारण है Tozer v. Child 1857 का जहां मामला निकाय चुनाव से संबंधित था। काश ऐसे न्यायमूर्ति भारत में भी 300 सालो में पैदा हुए होते, तो लोकतंत्र में मतदान प्रतिशत कुछ और ही होता। और सरकार का चयन भी शायद उस स्तर का होता।
मेरा कुछ अपना सुझाव जो मतदान को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है.........
1- जिस भी व्यक्ति को वोटर आईडी प्रदान की गई है, उसे लिस्ट में नाम ना होने के कारण मात्र से वोट देने से मना ना किया जाये।
2-जो व्यक्ति जहा है वही से ऑनलाइन अपने प्रत्याशी को वोट दे सकता है।
3-सरकार वो सभी सुविधाये मुहैया करवाये जिससे की हर व्यक्ति मतदान के लिए आ सके, अपना भागीदारी कर सके।
आखिर कब देश के पढे लिखे और युवा ऐसे मुद्दों पर देश में लहर उठाएंगे? मै तो अब इस मुहीम को शुरू कर रहा हू, अब देखना ये होगा कि आप कितना सहयोग कर रहे है।
मेरा कुछ अपना सुझाव जो मतदान को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है.........
1- जिस भी व्यक्ति को वोटर आईडी प्रदान की गई है, उसे लिस्ट में नाम ना होने के कारण मात्र से वोट देने से मना ना किया जाये।
2-जो व्यक्ति जहा है वही से ऑनलाइन अपने प्रत्याशी को वोट दे सकता है।
3-सरकार वो सभी सुविधाये मुहैया करवाये जिससे की हर व्यक्ति मतदान के लिए आ सके, अपना भागीदारी कर सके।
आखिर कब देश के पढे लिखे और युवा ऐसे मुद्दों पर देश में लहर उठाएंगे? मै तो अब इस मुहीम को शुरू कर रहा हू, अब देखना ये होगा कि आप कितना सहयोग कर रहे है।
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