In the beginning of modernization of societies women were considered relatively weak to men on following grounds:-
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Sunday, September 13, 2020
The Rights of Women in India
In the beginning of modernization of societies women were considered relatively weak to men on following grounds:-
आखिर जाति व्यवस्था कब तक ?
आज कश्मीर के लिए भारतीय संविधान में जिस अनुच्छेद 370 का जिक्र है और जिसका विरोध पूरा भारत करता है कि इसे हटा देना चाहिए...इसका विरोध आज से 70 वर्ष पूर्व जब संविधान का निर्माण हो रहा था उसी वक़्त "आज के दिन जन्मे भारत का सर्वश्रेष्ठ ब्रेन डॉ बी. आर. अम्बेडकर" जो संविधान ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष भी थे, ने भी किया था। उन्होंने स्पस्ट कहा था, एक कानून मंत्री होने के नाते मै ऐसा कश्मीर को एक अलग स्टेटस देने की बात से कभी भी सहमत नही होउंगा।
जिस "uniform civil code" मतलब की सबके लिए एक कानून की बात को लेके पुरे देश में घमासान मचा हुआ है उस "यूनिफार्म सिविल कोड" को संविधान में सामिल करने की बात भी "भीमराव रामजी अम्बेडकर" संविधान निर्माण के वक़्त ही कहते है परंतु अन्य विद्वानों को ये बात समझ नही आती है, जिसका परिणाम आज हम देख सकते है..हम सब भारतीय लोग कैसे झेल रहे है इन दोनों समस्याओ को ???
इस वर्ष हमसब उस महान व्यक्तित्व की 129 वी जयंती मना रहे हैं...उनकी "Life should be great rather than Long" वाले महान विचार अमल योग्य है।
सच में "भारत रत्न" प्राप्त, तथा विदेश के एक पत्रिका के सर्वे के अनुसार भारत का टॉप मोस्ट ब्रेन से नवाज़े जाने वाले बाबा साहेब को सत् सत् नमन ।।
संविधान में आपके योगदान को यह देश और विधि जगत के लोग कभी भुला नही पायेंगे परंतु मेरा सवाल तो यह है कि आखिर क्या कमी थी "हिन्दू" समाज में की बाबा साहेब जैसे पढे लिखे को 1956 में "बुद्धिज़्म" अपनाना पड़ा...कभी आपने सोचा है ??
मेरा अपना जवाब है इसके लिए कहीं न कहीं इसके लिए ज़िम्मेदार हिन्दू धर्म में जाति व्यवस्था है और इस व्यवस्था में जो ऊच नीच का कॉन्सेप्ट है वो तो और ही इसके लिए जिम्मेदार है। और शायद आज भी ये सोच कहि न कहि लोगो के बीच जिंदा है। इसी सोच को खत्म करने का प्रायस बाबा साहेब ने किया और उनके लिए सच्चा भारत रत्न का सम्मान तो यही होगा की समाज में सबका सामाजिक स्टेटस एक हो...ना कोई उच्च जाति का हो, ना ही कोई निम्न जाति का।
आखिर कब तक ये मानसिकता बनी रहेगी ? क्या हमसब अपना दिमाग कहीं छोड़ के आये है जो छोटी सी बात नही समझ सकते कि पहले जाति व्यवस्था का नाम व्यक्ति के कर्मो के आधार पे दिया गया था। परंतु आज तो ये स्वरुप नही है, मै कुम्हार के घर पैदा हुआ परंतु मै तो ब र्तन नही बना रहा, मै तो विद्या का अर्जन कर रहा तो फिर मुझे पंडित क्यों नही कहा जाता ? मै ब्राह्मण क्यों नही कहलाता ? और जो ब्राह्मण सफाई कर्मी में भर्ती होके नालियो की सफाई कर रहा उसे निम्न जाति सूचक शब्द "बहुजन " क्यों नही कहते ???
बहुत ही समझने की बात है यदि ये, जब जाति रहन सहन से तय होता तो देखिये उच् जातियो जैसा रहन सहन वाले निम्न जाति के लोगो को भी बातो बातो में मैंने कहते सुना है अरे बनिया ही तो है, कुम्हार ही तो है, चमार ही तो है(असंवैधानिक शब्द है किन्तु लोग जो बोलते उसे यहा प्रयोग किया गया है )..आखिर ये कह के लोग बताना या जताना क्या चाहते हैं कि कुछ भी कर ले बेटा हम बड़े है तो बड़े ही रहेंगे।,कहि न कहि ऐसी सोच वाले लोग एक खास मानसिकता के अभी भी गुलाम है।
समाज में लोगो ने ये जो पैमाना तैयार कर रखा है कि....अरे दिमाग कि बात ना करो ब्राह्मण हु,मतलब ब्राह्मण घर का जन्मा हर एक व्यक्ति दिमाग ले के ही पैदा होता है और बाकी तो...
अरे कलेजे की बात ना करो क्षत्रिय है,मतलब बाकि लोग डरपोक होते है या फिर उनके पास कलेजा नही होता....
अरे वो क्या उखाड़ लेगा ओ चमार (असंवैधानिक शब्द ) ही तो है, कुम्हार ही तो है, मतलब की ना उनके पास दिमाग होता और ना ही जिगरा।
बस यही सोच बदलने की जरुरत है...किसी भी चीज़ पर किसी का पेटेंट नही होता है। सही समाज के निर्माण के लिए जातिगत सोच को बदलने की बहुत जरुरत है....और जिस दिन ये बदला, शायद उसी दिन "जातिगत आरक्षण" भी समाप्त होने के आखिरी पड़ाव पर होगा।
उम्मीद है युवा पीढ़ी नई सोच के साथ समाज में बदलाव लाने कि ओर आगे बढ़ेगी।
पढ़ाई के साथ प्यार करना सही है या गलत ??
ज़्यादातर युवाओ के मन में, ख़ास कर किशोरों के मन में ये प्रश्न उथल पुथल मचाएं रखता है कि पढ़ाई के साथ प्यार करना सही है या गलत ??
देखिये कोई भी चीज़ सही या गलत एक दूसरे के रिस्पेक्ट में होती है, जैसे यदि प्यार के चक्कर में पढ़ाई डिस्टर्ब हो रही तो प्यार गलत है, प्यार और पढ़ाई दोनों जिन्दगी रूपी ट्रेन कि पटरियां है, जो एक दूसरे में कभी भी मिलती नही है।और हमे आपको एक दूसरे से मिलने भी नही देना है, वरना जब मिला तो दुर्घटना होना तो तय है।मेरा मनना है यदि आप पढ़ाई करने के साथ साथ boyfriend/girlfriend बनाते है तो बनाइये और उसको एन्जॉय भी करिये पर हाँ 'उस पार्ट ऑफ़ लाइफ' के किसी भी टेंशन को ले कर पढ़ाई ना डिस्टर्ब होने पाये तो, क्योंकि जब आप बाहर देखते होंगे सबके सब अपने अपने पेयर्स में है तो शायद एक पल के लिए आपको कमी या अकेलापन महशुस होता होगा और कहि न कहि वो अकेलापन आपकी पढ़ाई डिस्टर्ब कर देता है ,मगर यदि आपके पास कोई कमी ना हो
या फिर आप खुश हो तो पढ़ाई में भी मन लगेगा।
"Respect The Old Age"
बहुत ही आम सी बात है हमारे इंडिया में कि जैसे-जैसे बेटे-बेटियां उम्र में, ओहदे में बड़े होते जाते है, वैसे-वैसे उनके माँ-बाप उनकी नजरो में गवार, अनपढ़,असभ्य,और सठिया जाते है, और तो और बहु का रवैया तो उनके प्रति और भी गंदा हो जाता है । मैंने बहुत से दादा-दादी की आपबीती उनके ही मुंह सुनी है कि उनकी बहु सही तरीके से बात करने को तो छोड़िये, मारने- पीटने तक पर आ आती है। और उनका अपने खून का बेटा बैठे-बैठे सब तमाशे की तरह देखता रहता है।
हमारे इंडिया में अनगिनत "ओल्ड ऐज हाउस" हैं जहां अपने परिवार से सताये, छोड़ दिए गए बुजुर्गजन अपने अंतिम समय को कोसते है,और भगवान से प्रार्थना करते रहते हैं कि उनके बेटे- बेटियो, बहु-पोतो को खुश रखना, जिनकी वज़ह से आज वो अपने ही हाथो से बसाए घर में रहने को तरस रहे होते है।
नौकरी मिलने, घर बनाने, शादी होने के बाद लोगो के पास इतना वक्त नही होता कि वो अपने माँ बाप को अपने साथ रख सके, जिंदगी के अंतिम वक्त में उनके चेहरे पर मुस्कान ला सके, और उन्ही के खून पसीने से सींचे परिवार में परिवार का अहसास करवा पाये।
कितनी गंदी फितरत होती है इंसान की, कि बहुत जल्दी भूल जाता है कि जब उन्हें चलना नही आता था तो इन्ही हाथो ने हाथ पकड़ कर चलना सिखाया था।
जब खाना खाने नही आता था तो इन्ही हाथो ने खाना खिलाया था।
जब नींद नही आती थी तो इन्ही आवाजो ने लोरियां सुनाई थी,जो आज टर्र-टर्र सी लगती है।
जब कोई औकात नही थी तब इन्ही के हौसलो ने उड़ना सिखाया था।
जब कोई पहचान नही थी तब इन्होंने हमे अपना नाम दिया था।
मेरा बेटा कलेक्टर बनेगा बोल-बोल के माँ ने कलेक्टर बनाया था।
और आज जब सब कुछ हासिल हो जाता है तो साथ वही नही होते जिनकी वजह से ये सब कुछ हासिल हो पाया।
"ओल्ड ऐज हाउस""खोल देना बहुत अच्छी बात नही है, बुजुर्ग माँ बाप की जगह वृद्धाश्रम नही उनका खुद का घर होना चाहिए।
परंतु जब तक ये बात देश के हर बेटे और बहू को समझ आये तब तक तो "ओल्ड ऐज हाउस", "वृद्धाश्रम" एक वरदान और अधूरे सपने को पूरा करने के अधार की तरह होता है।
मेरा अपील है कि बदलते समय के साथ माँ-बाप के प्रति अपने कर्तव्यों को ना बदलने दे। सच्चे ईश्वर की भक्ति उनकी सेवा और उनकी इज्जत करने में है।
एक बुजुर्ग दादा जी ने बताया कि बेटा इस उम्र में कुछ नही चाहिए बस जरा सा इज्ज़त और प्यारी सी बोली ही काफी है।
Saturday, September 12, 2020
मतदान प्रक्रिया में सुधार की आवश्कयता
लोकतंत्र_बचाओ_अभियान
यदि हम अपने देश में लोकतंत्रात्मक व्यवस्था होने का दावा करते है तो इसके लिए सबसे ज्यादा जरुरी चीज ये है कि अधिक से अधिक लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करे।क्या कभी आपने सोचा है क्यों मतदान के दिन अपने देश के निर्वाचन क्षेत्रो में मतदान का प्रतिशत बहुत कम होता है????
आज मै पोलिंग बूथ पर एक महानुभाव द्वारा बुलाया गया, कि कुछ लोगो का नाम मतदान के लिए वहा मौजूद लिस्ट में नही था, जिसे नेट द्वारा इलेक्शन कमीशन के साइट से निकालना था, मै जब पोलिंग बूथ पर पंहुचा तो वहा जो आलम था उसे देख के बहुत दुःखी हुआ, अपने देश में बेमतलब के कितने मुद्दे उठते रहते है, परंतु जिन मुद्दों की सबसे ज्यादा जरुरत होती, उस तरफ किसी का भी ध्यान नही जाता। लोग भारत सरकार द्वारा प्राप्त "वोटर आइडी" ले के आ रहे और उनका नाम वोटर लिस्ट में ना होने के कारण वोट देने से वंचित किये जा रहे है, उन्ही लोगो के लिए मै बुलाया गया था की उनका नाम चेक कर सकूँ कि क्या वेबसाइट पर अंकित है या नही, तब तो और अफ़सोस हुआ कि वेबसाइट भी अपडेट नही थी, चेक करने के लिए मैंने वहा के लिस्ट में मौजूद नाम को वेबसाइट से चेक किया तो रिजल्ट नॉट फाउंड मिला जिससे जाहिर हो गया कि वेबसाइट भी सरकार की ही तरह है जो आज आजादी के बाद भी अपडेट नही हो पाई है। उस महिला के लिए क्या जवाब है सरकार के पास जो साइकिल चला के बूथ तक अपने वोटर आइडी के साथ आई थी परंतु नाम लिस्ट में नही था?? उस बूढ़े बाबा के लिए क्या जवाब है जिनकी उम्र 90 की थी और लाठी टेकते हुए बूथ तक आये पर बिना वोट दिए वापस जाना पड़ा कारण वोटर आईडी है पर लिस्ट में नाम नही।
मेरा कुछ अपना सुझाव जो मतदान को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है.........
1- जिस भी व्यक्ति को वोटर आईडी प्रदान की गई है, उसे लिस्ट में नाम ना होने के कारण मात्र से वोट देने से मना ना किया जाये।
2-जो व्यक्ति जहा है वही से ऑनलाइन अपने प्रत्याशी को वोट दे सकता है।
3-सरकार वो सभी सुविधाये मुहैया करवाये जिससे की हर व्यक्ति मतदान के लिए आ सके, अपना भागीदारी कर सके।
आखिर कब देश के पढे लिखे और युवा ऐसे मुद्दों पर देश में लहर उठाएंगे? मै तो अब इस मुहीम को शुरू कर रहा हू, अब देखना ये होगा कि आप कितना सहयोग कर रहे है।
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